ہفتہ، 15 اگست، 2015

Samir Parimal ka kalaam

सद्र-ए-मोहतरम की इजाज़त से पेशे-ख़िदमत है एक मतला और दो शे'र

हर धड़कते दिल में इक तूफ़ान होना चाहिए
ज़िन्दगी का भी कोई उन्वान होना चाहिए

हक़ ख़ुदाई पर तेरा है, मानते हैं हम मगर
अपने हिस्से भी कोई भगवान् होना चाहिए

नफ़रतों के इस जहां में बात हो जब अम्न की
हर तरफ चर्चा-ए-हिंदुस्तान होना चाहिए

© समीर परिमल, पटना

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