खिजाॅ के साये से डर गये हैं
तभी ये पत्ते बिखर गये हैं
किसी ने दिल से पुकारा ऐसे
वो चलते-चलते ठहर गये हैं
संजोये बैठे हैं जिन पलों को
वो लम्हे कब के गुजर गये हैं
असर किसी का नहीं है अब तो
वो करके ऐसा असर गये हैं
उदास आँखों में उतरी परियाॅ
तो इनके मोती सॅवर गये हैं
भावना
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